जांभाणी संस्कार शिविर का भव्य समापन, विद्यार्थियों को प्रदान किए गए पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र

हरियाणा बिश्नोई समाचार आदमपुर, 05 जून। भगवान गुरु जम्भेश्वर मंदिर, पश्चिम पाना, आदमपुर में जाम्भाणी साहित्य अकादमी के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय जांभाणी संस्कार शिविर का आज भव्य एवं गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। समापन समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, गणमान्य नागरिकों एवं समाज के प्रबुद्धजनों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर रवींद्र जी बैनीवाल रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रोफेसर रामसिंह बैनीवाल, श्री प्रदीप जी बैनीवाल, डॉ. सुरेंद्र जी खीचड़, श्री कैलाश जी, श्री सहदेव जी तथा एडवोकेट चंद्रप्रकाश जी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का अकादमी पदाधिकारियों द्वारा सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ हवन एवं प्रार्थना से हुआ। प्रथम सत्र में अधिवक्ता श्री नरषोत्तम मेजर ने "ग्राम आदमपुर की स्थापना, इतिहास, संस्कृति एवं सामाजिक विकास" विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके पश्चात श्री विजय जी ने "बिश्नोई समाज की प्रमुख विभूतियाँ : ऐतिहासिक विरासत से वर्तमान तक" विषय पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

द्वितीय सत्र में हरियाणा पुलिस के उप-निरीक्षक श्री हवा सिंह जी ने "विद्यार्थी जीवन एवं नशा जागरूकता" विषय पर व्याख्यान देते हुए युवाओं को नशे से दूर रहने तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। इसके उपरांत डॉ. सुभाष बिश्नोई ने "विद्यार्थी जीवन, नैतिक मूल्य एवं समकालीन चुनौतियाँ" विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर रवींद्र जी बैनीवाल ने कहा कि "संस्कार ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान होते हैं। आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का समावेश अत्यंत आवश्यक है। जांभाणी संस्कार शिविर जैसे आयोजन बच्चों और युवाओं को अपनी जड़ों, संस्कृति और महान परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। आज के समय में जब युवा अनेक सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे शिविर उनमें चरित्र निर्माण, अनुशासन, सेवा भावना, पर्यावरण संरक्षण एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।"

उन्होंने जाम्भाणी साहित्य अकादमी की सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा नई पीढ़ी को गुरु जांभोजी की शिक्षाओं एवं बिश्नोई संस्कृति से जोड़ने का जो प्रयास किया जा रहा है, वह समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय है।

समापन समारोह में शिविर परीक्षा, भाषण प्रतियोगिता, गीत गायन प्रतियोगिता एवं अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। सभी शिविरार्थियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। साथ ही अतिथि वक्ताओं, सहयोगकर्ताओं एवं आयोजन में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं का भी सम्मान किया गया।

विद्यार्थियों ने शिविर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें गुरु जांभोजी के सिद्धांतों, बिश्नोई संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे संस्कार शिविर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम हैं।

शिविर प्रभारी डॉ. कृपा राम बिश्नोई ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, अभिभावकों, सहयोगकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। शिविर संयोजक श्री कृष्णलाल बैनीवाल ने सफल आयोजन के लिए सभी के सहयोग की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।

पांच दिनों तक चले इस शिविर में विद्यार्थियों को जांभाणी दर्शन, बिश्नोई संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, नैतिक शिक्षा, सामाजिक चेतना, व्यक्तित्व विकास एवं समसामयिक विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

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