राजस्थान बिश्नोई समाचार जोधपुर ज्येष्ठ अमावस्या पर आयोजित समारोह में न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई और राज्यमंत्री के.के. बिश्नोई रहे मुख्य आकर्षण
जोधपुर। ज्येष्ठ अमावस्या के पावन एवं आध्यात्मिक अवसर पर जाम्भाणी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित नवचयनित राज्य एवं राष्ट्रीय स्तरीय प्रतिभा अभिनंदन समारोह सामाजिक चेतना, शैक्षिक जागरूकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रेरणादायी आयोजन बन गया। समारोह में पहली बार बड़ी संख्या में राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न उच्च शासकीय एवं राष्ट्रीय पदों पर चयनित बिश्नोई समाज की प्रतिभाओं का सार्वजनिक सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में संत सान्निध्य के रूप में श्री शिवदास जी शास्त्री रूड़कली, लालासर साथरी के महंत डॉ. आचार्य स्वामी सच्चिदानंद जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ, जबकि अध्यक्षता राजस्थान सरकार के राज्यमंत्री के.के. बिश्नोई ने की।
इस अवसर पर जसवंतसिंह बिश्नोई, सुखराम बिश्नोई, अभिमन्यु पूनियाँ, महेन्द्र बिश्नोई एवं किशनाराम बिश्नोई सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। अतिथियों ने नवचयनित प्रतिभाओं को समाज का गौरव बताते हुए कहा कि शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों के बल पर युवा नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहे हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डॉ. एल.आर. बिश्नोई ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में युवाओं को राष्ट्रसेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति का आधार शिक्षा और सकारात्मक सोच है।
समारोह के दौरान समाज के शिक्षाविदों, चिंतकों एवं प्रबुद्धजनों ने नवचयनित प्रतिभाओं की उपलब्धियों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे बिश्नोई समाज के उज्ज्वल भविष्य का सकारात्मक संकेत बताया।
कार्यक्रम के अंत में जाम्भाणी साहित्य अकादमी की अध्यक्षा डॉ. इन्द्रा बिश्नोई ने सभी अतिथियों, प्रतिभाओं एवं समाजबंधुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अकादमी भविष्य में भी समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
समारोह ने यह संदेश दिया कि जब शिक्षा, संस्कार और समाजहित की भावना एक साथ आगे बढ़ती है, तब नई पीढ़ी केवल सफलता ही नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनती है।
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