राजस्थान बिश्नोई समाचार बाङमेर सेड़वा -जिले में बिश्नोई समाज का सबसे प्राचीन एवं भव्य श्री गुरु जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी में 397 वां विशाल श्री गुरु जंभेश्वर मेला बड़ी श्रद्धा व उल्लास के साथ में संपन्न हुआ जिसमें हजारों पर्यावरण प्रेमियों ने भगवान जांभोजी के मंदिर में शीश निवाकर विशाल यज्ञ में घी, नारियल हवन सामग्री का स्वाह के साथ में आहुतियां देते हुए सुकाल की मंगल कामना की।
प्राचीन समय से चली आ रही मेला संस्कृति अपने आप में एक अनूठी एवं ऐतिहासिक परंपरा रही है जिसमें मेले में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने जान पहचान नाते रिश्तेदारी सुख-दुख एवं क्या खोया क्या पाया पर मंथन करते हैं इसी के तहत बाड़मेर जिले में बिश्नोई समाज का सबसे प्राचीन एवं भव्य श्री गुरु जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी जहां प्रतिवर्ष तीन मेले लगते हैं इस वर्ष फागुनी अमावस्या पर विशाल श्री गुरु जंभेश्वर मेला भरा गया जिसमें हजारों पर्यावरण प्रेमियों ने भगवान जांभोजी के मंदिर में वर्षों से प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति के दर्शन कर भगवान जांभोजी से खुशहाली की कामनाएं की। प्रातः आठ बजे सोनड़ी के संत स्वामी रामानंद महाराज के पावन सानिध्य में विशाल यज्ञ में भगवान जांभोजी की शब्दवाणी के 120 शब्दों से यज्ञ एवं अमृत रूपी पाहल बनाकर सैकड़ो श्रद्धालुओं को नशा मुक्त जीवन जीने का संकल्प देते हुए अमृत पान करवाया।
मंदिर में भक्तों ने भगवान जांभोजी की जय जयकार से पूरा वातावरण को भक्तिमय बना दिया देखते ही देखते यज्ञ की 50-50 फीट ऊपर लपटे उठने लगी, साथ ही मूक पक्षियों के लिए बाजरी, गेंहू, अनाज चुगे का ढेर लगा दिया, भक्तो के उल्लास भरे इस वातावरण में हर कोई भाव विभोर हो रहा था जैसे-जैसे सूर्य चढ़ता गया श्रद्धालुओं का ज्वार बढता गया। मेले के मंच से भगवान जांभोजी की साखी, भजन, कीर्तन की स्वर लहरियां चारों ओर से गूंजायमान हो रही थी मधुर कंठ के धनी बिश्नोई समाज के विद्वान संगीतकार आचार्य स्वामी राम शरणानंद महाराज सालासर धाम ने भगवान जांभोजी की शब्दवाणी और 29 नियमों की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं है ईश्वर को हमारे भीतर खोजने की आवश्यकता है अक्सर लोग यह मानते हैं कि ईश्वर किसी विशेष स्थान पर है तीर्थ स्थल में है या किसी गुरु के माध्यम से मिलता है यह धारणा गलत है सभी धार्मिक ग्रंथ यह कहते हैं कि ईश्वर का निवास स्थान हमारे भीतर है। बाहरी अनुष्ठान चमत्कार केवल प्रतीकात्मक है इसका उद्देश्य हमें आत्म जागृति की ओर प्रेरित करना है।
भगवान जांभोजी के 29 नियमों को अपने जीवन में सख्ती से उतारें:- अनन्तराम
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अनन्तराम बिश्नोई ने मंच से फागुनी अमावस्या की शुभकामना देते हुए कहां की भगवान जाम्भाजी द्वारा प्रदत्त 29 नियमों को अपने जीवन में धारण करते हुए कड़ाई से पालन करें जो 29 नियम दिए हैं वह मानव मात्र के कल्याण के लिए ना किसी धर्म जाति संप्रदाय विशेष के हैं।भौतिकवादी कुरुतियों को त्यागते हुए सात्विक जीवन जीने का आह्वान किया।
धोरीमना उपखंड अधिकारी भंवरलाल बिश्नोई ने कहां समाज कि बच्चे परिवार का धन है जिसको शिक्षा और संस्कार के साथ में नशा मुक्त जीवन जीने के लिए प्रत्येक माता-पिता का परम कर्तव्य हैं। भौतिकवादी युग में बच्चे देखा देखी एवं भौतिक चक्काचौंद में सब कुछ भूलकर के गलत रहा पकड़ लेते हैं जो उनके लिए ही नहीं परिवार और समाज के लिए बर्बादी का मुख्य कारण बनती है। अभिभावक जब तक चेतते हैं तब तक समय हाथ से निकाल जाता है तब पछतावे के अलावा कुछ भी नहीं रहता है।
खुले अधिवेशन को संबोधित करते हुए बिश्नोई समाज सेवा समिति के सचिव गंगाराम सियाक ने कहा की बच्चों की शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन निर्माण बच्चों में घर से आता है। सत्य, संयम धर्म का पालन किया जाए तो उसका फल प्राप्त किया जा सकता है फल तो वही पायेगा जो मन लगाकर धर्म का आचरण करेगा।
सोनड़ी सरपंच भारमल राम खिलेरी ने सभी का आभार प्रकट करते हुआ समाज में भाईचारे और सौंहार्द्र का वातावरण बनाए रखें जाति धर्म और क्षेत्रीय विभाजन से ऊपर उठकर मानवता के कल्याण के लिए काम करें।
कार्यक्रम का संचालन बिश्नोई समाज सेवा समिति के कोषाध्यक्ष सुखराम खिलेरी ने किया।
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