हक की कमाई करें ,जीवन में कभी नशा नहीं करने का संकल्प लें -आचार्य स्वामी रामानंद महाराज - Bishnoi News

राजस्थान बिश्नोई समाचार बाङमेर श्रीबालाजी स्थानीय चमत्कारी हनुमान मंदिर के पास सुथारों की ढाणी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन आज मुकाम पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी रामानंद जी महाराज ने श्रोताओं को संबोधित किया । आचार्यश्री ने कहा कि जीवन जीने की विधि और तरीका कथाओं के माध्यम से सीखा जाता है। परमात्मा ने दया करके हमें मनुष्य जीवन प्रदान किया है और परमात्मा ने ही हमें सत्संग का अवसर प्रदान किया है। मनुष्य की बुद्धि बहुत नाजुक होती है उन्होंने कहा कि मनुष्य का खान पान रहन सहन सही होना चाहिए अगर खानपान सही नहीं हुआ अखाद्य वस्तु को खाया गया या किसी प्रकार का नशा किया जाता है तो मनुष्य की बुद्धि मलीन हो जाती है। मनुष्य की बुद्धि पर उसकी कमाई का असर भी पड़ता है ।आचार्य श्री ने कहा कि सुखी जीवन जीने के लिए हक की कमाई करके धन का उपयोग करना चाहिए।
      उन्होंने तंबाकू के नशे को सबसे अधिक घातक बताया और निंबी ऋषि की तपस्या का उदाहरण देकर स्पष्ट किया कि तंबाकू के असर से तपस्या का महातेज भी नष्ट हो जाता है। 
           कथा के दौरान भागवत भूषण आचार्य बजरंगदास महाराज ने कहा कि व्रत का मतलब संकल्प लेना होता है और उपवास का मतलब उपासना करना होता है । उन्होंने श्रीरामकथा पर संगीतमय व्याख्यान दिया ।कृष्ण की कथा से पहले राम की कथा का श्रवण उपयोगी बताया । आचार्य ने आज मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की संपूर्ण कथा संक्षेप में सुनाई ।उन्होंने महाराजा दशरथ के निसंतान होने ,पुत्र कामना यज्ञ करने ,रामावतार होने, रामअवतार की खुशियां मनाने, चारों भाइयों के नामकरण करने की कथा वर्णन की । उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और मनुष्य जीवन का मूल लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति ही होता है । आगे की कथा में श्रीराम के स्वयंवर की कथा ,धनुष तोड़ने की जानकारी, मंगल गीत, श्री राम सहित चारों भाइयों के विवाह ,मंथरा दासी की मंदबुद्धि केकैयी द्वारा वरदान मांगना, श्री राम का वन गमन ,राजा दशरथ का देहांत भाई भरत द्वारा पिता अंत्येष्टि का महायज्ञ करना ,चरण पादुका को राजगद्दी पर रखना,  वन में राम का अनुसूया आश्रम जाना ,पंचवटी में जाना, राम और सूर्पनखा की कथा, हनुमान महिमा ,संक्षेप में श्री राम कथा कहीं । उन्होंने भरत मिलाप ,भाइयों के आपसी प्रेम की मार्मिक कथा कही। संक्षेप में रामकथा के बाद आचार्य श्री ने चंद्रवंश की कथा का शुभारंभ किया।कंस के जन्म कंस के द्वारा भयंकर पापकर्म, श्री कृष्ण के अवतार की कथा के साथ ही धूमधाम से नंदोत्सव मनाया जिसमें मंच पर नंदबाबा छाबड़ी में नवजात शिशु को लाए उसकी झांकी सजाई गई ।पांडाल में खुशी का माहौल छा गया ।लोगों ने झूम झूम कर ,नाच नाच कर नंदोत्सव मनाया । इस अवसर पर गत दिनों भारत के महामहिम राष्ट्रपति से सम्मानित पदम श्री हिम्मताराम भांभू  का भी मंच पर स्वागत किया गया । आगंतुक संतों का स्वागत किया गया अन्य विभिन्न अतिथियों का स्वागत किया । पीपासर धाम के महंत स्वामी भक्ति स्वरूप जी महाराज भी आज की कथा में मौजूद रहे । श्रीबालाजी के थानाधिकारी शिव सिंह का भी मंच पर स्वागत किया गया । कथा आयोजक मदनलाल तिलोक तथा पुखराज माकड़ ने सभी आगंतुकों का भावभीना स्वागत सत्कार किया।
       उल्लेखनीय है कि गत 6 दिनों से सुथारों की ढाणीयां श्रीबालाजी में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ चल रहा है जिसमें प्रातः काल 2 घंटे प्रतिदिन यज्ञ हवन और पूजा होती है । दिन में 4 घंटों तक श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा होती है और शाम को 8 से 10 बजे तक प्रतिदिन भजन कीर्तन होता है । आज मंगलवार होने के कारण शाम को 6:30 बजे से रामचरित मानस के सुंदरकांड का पाठ भी किया गया ।
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